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बदन होता है बूढा

बदन होता है बूढा, मन अपनी फितरत छोड़ता है क्या
पुराना होकर भी कुकर सिटी बजाना छोड़ता है क्या
बीमार दिल के लोग साथ-साथ मिलेंगे
वक्त की धारा ने सिकंदर को बहा दिया
चाहत की सुनामी ने कई लोगों को बहा दिया
जो जीत के दावे थे, सभी हार हो गए
हम कल्लुओं के सामने लाचार हो गए
पासे पलट गए सियासत के खेल में
वेटिंग भी नहीं मिल रहा लालू की रेल में।
आनंद अनल
वरीय सब-एडिटर
प्रभात ख़बर
धनबाद


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