Header Ads

ऐसा हो साल नया

खेतों को अनाज मिले
बैलों को सानी
जंगल को पेड़ मिले
नदिया को पानी
बिटिया को प्यार मिले
बेटे को काज
तवे को रोटी मिले
चूल्हे को आग
बटिया को राही मिले
प्यासे को कुआं
बच्चों को खेल मिले
चिमनी को धुआं
सागर भी नीला रहे
पर्वत हो धानी
ऐसा हो साल नया
जिसके हों मानी
यह कविता प्रभात खबर के पहले पेज पर 1 जनवरी 2009 को छपी है.

4 comments

sandhyagupta said...

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !!

हरकीरत ' हीर' said...

तवे को रोटी मिले
चूल्हे को आग
बटिया को राही मिले
प्यासे को कुआं
बच्चों को खेल मिले
चिमनी को धुआं
bhot acchi lagin ye paktiyan kuch alag si...
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !!

daanish said...

aapki iss nek prarthna mein hm sb shaamil hain....
aapke vichaar vandaneey aur anukaraneey hain...!
badhaaee !!
---MUFLIS---

सागर मंथन... said...

सुनील जी नए साल की नई उम्मीदे बड़े सलिखे से सजोई है...

Partner : ManthanMedia.com. Theme images by Maliketh. Powered by Blogger.