बैठा रहा मैं उसके इंतज़ार में
अमिताभ प्रियदर्शीजिन्दगी मेरे पास से हो कर गुजर गई,
बैठा रहा मैं उसके इंतज़ार में।
गुलों की तिजारत करता रहा उम्र भर,
पर तकदीर फंस कर रह गयी खार में।
क्यों मुहबत्त को करें बदनाम यारा,
जब दिल ही बेवफाई कर गया।
धोखा, फरेब, रुसवाई सब बेचारे हैं
ये ख़ुद ही छले गए हैं प्यार में ।
कवि प्रभात खबर, धनबाद में उप-संपादक हैं।
4 comments
बहुत बढिया रचना प्रेषित की है। बधाई।
बहुत सुंदर रचना लिखी है उन्होने.....
सुंदर रचना थोडी बहुत कलम घसीटी मैं भी कर लेती हूँ ..एक कविता भेजूं छाप सकेंगे क्या ?
और जरा यह वर्ड वेरिफिकेसन हटा दें बड़ी तकलीफ होती है टिप्पणी देने में इसके कारन ..कोई तकनीकी समस्या हो तो बताएं .
प्रकृति ने हमें केवल प्रेम के लिए यहाँ भेजा है. इसे किसी दायरे में नहीं बाधा जा सकता है. बस इसे सही तरीके से परिभाषित करने की आवश्यकता है. ***वैलेंटाइन डे की आप सभी को बहुत-बहुत बधाइयाँ***
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'युवा' ब्लॉग पर आपकी अनुपम अभिव्यक्तियों का स्वागत है !!!
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