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नदीम अख्तर

प्रभात खबर ने किशोरावस्था की दहलीज़ लांघकर जवानी की सीढ़ियों पर कदम रख दिया है। 14 अगस्त 1984 को शुरू हुआ कारवां आज (2008 में) 25वें वर्ष में प्रवेश कर गया। रांची से प्रभात खबर ने जो लंबी पारी की शुरुआत की थी, उसकी सार्थक परिणति धीरे-धीरे ही सही लेकिन दृढ़ता के साथ सामने आयी। हरिवंश जी के कुशल नेतृत्व में प्रभात खबर ने जो बुलंदियां हासिल की हैं, मीडिया समूह में उसकी मिसाल फिलहाल कहीं नज़र नहीं आती। एक गुमनाम अखबार को 24 वर्षों की अवधि में हरिवंश जी और उनकी टीम ने जिस अथक मेहनत से आज पूरे देश का एक आदर्श स्थापित स्वरूप प्रदान किया है, वह वास्तव में सीखनेवाली बात है। वैसे तो प्रभात खबर के इस सफर के कई साथी रहे, लेकिन आज भी श्रीनिवास जी, मधुकर जी, ओम प्रकाश अश्क जी, अनुज कुमार सिन्हा जी, विजय पाठक जी, विनय भूषण जी, अनिल झा जी जैसे लोग प्रभात खबर को जो बेशकीमती ऊर्जा दे रहे हैं, उसकी बदौलत अखबार बुलंद हौसलों के साथ आगे बढ़ता जा रहा है। प्रभात खबर के 25वें वर्ष के प्रवेश के अवसर पर अखबार की साज-सज्जा में बेहतरीन बदलाव लाये गये हैं, जो पाठकों को और रुचिकर पठनीयता प्रदान करने में सक्षम प्रतीत हो रहे हैं। प्रभात खबर के पचीस वर्ष पूरे होने के मौके पर एक पुस्तक के लोकार्पण की भी योजना है, जिसे निराला लिख रहे हैं, ऐसी खबर है। प्रभात खबर के 24 वर्ष पूरे होने और पचीसवें वर्ष में प्रवेश करने रांचीहल्ला टीम की ओर से ढेर सारी बधाइयां।
साभार : रांचीहल्ला.ब्लागस्पाट.कॉम

3 comments

शोभा said...

अच्छा लिखा है। स्वागत है नए ब्लाग का।

شہروز said...

bhai nadeem ke paas to ranchihalla hai hi, yahan post to aapki likhi honi thi.aainda dhyaan rakhiye,
waise bhai swagat hai.
nadeem ne khoob likh hai.
harivanshji gar dhyaan den to balle-balle.

http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com/
http://hamzabaan.blogspot.com/
http://saajha-sarokaar.blogspot.com/

डा ’मणि said...

सादर अभिवादन
पहले तो हिन्दी ब्लोग्स के नए साथियों में आपका असीम स्वागत है
दूसरे आपकी अच्छी रचना के लिए बधाई
चलिए अपने परिचय के लिए अभी मैंने एक गीत ब्लॉग पे डाला है उसकी कुछ पंक्तियाँ भेज रहा हूँ
देखियेगा

और कुछ है भी नहीं देना हमारे हाथ में
दे रहे हैं हम तुम्हें ये "हौसला " सौगात में

हौसला है ये इसे तुम उम्र भर खोना नहीं
है तुम्हें सौगंध आगे से कभी रोना नहीं
मत समझना तुम इसे तौहफा कोई नाचीज है
रात को जो दिन बना दे हौसला वो चीज है

जब अकेलापन सताए ,यार है ये हौसला
जिंदगी की जंग का हथियार है ये हौसला
हौसला ही तो जिताता ,हारते इंसान को
हौसला ही रोकता है दर्द के तूफ़ान को

हौसले से ही लहर पर वार करती कश्तियाँ
हौसले से ही समंदर पार करती कश्तियाँ
हौसले से भर सकोगे जिंदगी में रंग फ़िर
हौसले से जीत लोगे जिंदगी की जंग फ़िर

तुम कभी मायूस मत होना किसी हालात् में
हम चलेंगे ' आखिरी दम तक ' तुम्हारे साथ में

आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में
डॉ उदय मणि कौशिक
http://mainsamayhun.blogspot.com

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