लघुकथा
सुनील मंथन शर्मा
नहीं मैं तुम्हारे बगैर नहीं रह सकता। मोबाईल पर राजेश किसी से कह रहा था। तभी दूसरे मोबाईल की घंटी बजी। रिसीव करते ही बोला, जानेमन कब से मैं तुम्हारे फोन का इंतजार कर रहा था।
सुनील मंथन शर्मा
नहीं मैं तुम्हारे बगैर नहीं रह सकता। मोबाईल पर राजेश किसी से कह रहा था। तभी दूसरे मोबाईल की घंटी बजी। रिसीव करते ही बोला, जानेमन कब से मैं तुम्हारे फोन का इंतजार कर रहा था।
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