उलट गया नकाब तेरा तकदीर से सामना होगया अपनी ही तस्वीर से अब पशेमान कयूं हैं नजर तेरी उठते उठते कद्र की है जिन्दगी की तो सांस रुकते रुकते अंजाम सोचना था कजा की हद से पहले अब आ ही गई है तो आगोश में ले ले रचना गौड़ ’भारती’ http://rachanabharti.blogspot.com/
No comments
Post a Comment