हे ईश्वर!!!

ईश्वर!
सड़क बुहारते भीकू से बचते हुए
बिल्कुल पवित्र पहुंचती हूं तुम्हारे मंदिर में
ईश्वर!
जूठन साफ करती रामी के बेटे की
नजर न लगे इसलिए
आनचल से ढंक कर लाती हूं तुम्हारे लिए मोहनभोग की थाली
ईश्वर!
दो चोटियां गुंथे रानी आ कर मचले
उससे पहले
तुम्हारे शृंगार के लिए तोड़ लेती हूँ
बगिया में खिले सारे फूल
ईश्वर!
अभी परसों मैंने रखा था व्रत
तुम्हें खुश करने के लिए
बस दूध, फल, मेवे और मिठाई से मिटायी थी भूख
कितना मुश्किल है अन्न के बिना जीवन
तुम नहीं जानते
ईश्वर!
दरवाज़े पर दो रोटी की आस लिये आये व्यक्ति से पहले
तुम्हारे प्रतिनिधि समझे जाने वाले पंडितों को
खिलाया जी भर कर
चरण छू कर लिया आशीर्वाद
ईश्वर!
नन्हें नाती की ज़िद सुने बिना मैंने
तुम्हें अर्पण किये रितुफल
ईश्वर!
इतने बरसों से
तुम्हारी भक्ति, सेवा और श्रद्धा में लीन हूँ
और
तुम हो कि कभी आते नहीं दर्शन देने!!!
1 comment
ईश्वर के पास जाने के लिए जो साधन बनाये गए थे, अब वही हमें उससे दूर कर रहे हैं.
Post a Comment