मेरा परिचय
मैं नदी हूँ ....शब्दों की
अनवरत बहती रहती हूँ
तैरती लय के लहरों पर
छंदों के झूले झूलती हूँ
बहती हूँ मात्राओं सँग
लय आकाश में उड़ती हूँ
अंतरा संग लहराती मैं
दोहे संग ...विचरती हूँ
अक्षर के घर ...डेरा मेरा
जीवन पन्ने पर बिखरती हूँ।।
सत्या नाम दिया पिता ने
माता को कीर्ति लगती हूँ ।
हृदय में मेरे साहित्य बसा
सरस्वती साधना करती हूँ ।
मिला कर सारे भावों को
हर रोज कविता बनती हूँ ।।
सत्या शर्मा ' कीर्ति '.


No comments
Post a Comment