परमपिता तू परमात्मा प्रतापी प्रभु
परमपिता तू परमात्मा प्रतापी प्रभु ,
परम पवित्र सब तेरा कारोबार है।
परम पवित्र सब तेरा कारोबार है।
परम पवित्र सब तेरा कारोबार है।
परम पवित्र सब तेरा कारोबार है।
परम पवित्र सब तेरा कारोबार है।
अलख, अनादि , अविनाशी , तू अखण्ड नाथ ,
अडिग , अगोचर , तू अगम , अपार है ॥
सर्व निवासी , दीनबन्धु , दया सिन्धु तू ही ,
तेरा ही बनाया हुआ सारा संसार है।
सबका सहारा 'कुसुमाकर' एक तू ही नाथ,
सुन्दर - सी सृष्टि का तू ही तो करतार है ॥१॥
अखिल भुवन का है पालक जगत पाल,
पल-पल करता सभी की देखभाल है।
छोटे -,बड़े सबको रिजक पहुँचाता यही ,
कीरी से करि तक ये इसका कमाल है ॥
छोड़ अभिमान जो भी इसकी शरण आये ,
एक क्षण माहि करे उसे मालामाल है।
परम दयालु है , कृपालु है, कृपा निधान ,
भक्तों को 'कुसुमाकर' करता निहाल है।।२॥
देश में रहने वाले, इस देश को जय हिन्द कहते हैं,
इस बन्दे कोइस लोग प्यार से, अरविन्द कहते हैं।
गिरिडीह में रहता हूँ, पैतृक गांव है राजधनवार,
25 साल से पत्रकारिता में हूँ, लगा न बेड़ा पार।
औरों की तरह मुझे भी जब, परेशान किया आर्थिक मार,
पेट-परिवार चलाने को, शुरू किया व्यापार।
मेरा ऑफिस का पता, गिरिडीह का टावर चौक है,
बचपन से ही मुझे, समाज सेवा का भी शौक है।
सेवा भाव के कारण ही, मैं दूसरे पथ पर भी मुड़ गया,
लायंस क्लब और रेड क्रॉस समेत, कई संस्थाओं से जुड़ गया।
अपने लोगों के धोखे से, मैं हमेशा डरता हूँ,
आपलोग के संगत में आकर, अब कविता पाठ भी करता हूँ।
अरविन्द✍
🙏🙏🙏🙏

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