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उद्गार




परमपिता तू परमात्मा प्रतापी प्रभु ,
                       परम पवित्र सब तेरा कारोबार है।
अलख, अनादि , अविनाशी , तू अखण्ड नाथ ,
                 अडिग , अगोचर , तू अगम , अपार है ॥
सर्व निवासी , दीनबन्धु , दया सिन्धु तू ही ,
                    तेरा ही बनाया हुआ सारा संसार है।
सबका सहारा 'कुसुमाकर' एक तू ही नाथ,
                सुन्दर - सी सृष्टि का तू ही तो करतार है ॥१॥



अखिल भुवन का है पालक जगत पाल,

                 पल-पल करता सभी की देखभाल है।

छोटे  -,बड़े सबको  रिजक पहुँचाता यही ,
                   कीरी से करि तक ये इसका कमाल है ॥
छोड़ अभिमान जो भी  इसकी शरण आये ,
                   एक क्षण माहि करे उसे मालामाल है।
परम दयालु  है , कृपालु है, कृपा निधान ,
                  भक्तों को 'कुसुमाकर' करता निहाल है।।२

   परमपिता तू परमात्मा प्रतापी प्रभु ,
                       परम पवित्र सब तेरा कारोबार है।
अलख, अनादि , अविनाशी , तू अखण्ड नाथ ,
                 अडिग , अगोचर , तू अगम , अपार है ॥
सर्व निवासी , दीनबन्धु , दया सिन्धु तू ही ,                    तेरा ही बनाया हुआ सारा संसार है।
सबका सहारा 'कुसुमाकर' एक तू ही नाथ,
                सुन्दर - सी सृष्टि का तू ही तो करतार है ॥१॥
अखिल भुवन का है पालक जगत पाल,
                 पल-पल करता सभी की देखभाल है।

छोटे  -,बड़े सबको  रिजक पहुँचाता यही ,
                   कीरी से करि तक ये इसका कमाल है ॥
छोड़ अभिमान जो भी  इसकी शरण आये ,
                   एक क्षण माहि करे उसे मालामाल है।
परम दयालु  है , कृपालु है, कृपा निधान ,
                  भक्तों को 'कुसुमाकर' करता निहाल है।।२॥         ,
             ।।२॥




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