अतिक्रमण
स्नेह पांडेय
अतिक्रमण
अतिक्रमण से पीड़ित परिवार,
नही है इनके कोई पालनहार,
कोई बसाते हैं कोई उजाड़ते हैं
क्या होगा इनके बच्चों का संस्कार।
पढ़ाई से कोसों दूर , भूखे पेट ,
इधर उधर दौड़ते बच्चे कल ,
उठा लेंगे बन्दूक और तलवार,
कोई बनेंगे चोर तो कोई डाकू,
फिर बन जाँयेंगे आतंकवाद।
कौन पकड़ाएगा इनके कलम का तलवार ।
नीति नियमो का हो रहा है संहार,
नीति से प्रीति से नही है किसी को सरोकार।
मानव ही मानव का कर रहा है संहार ।
ये सब देख कर भी नही आते कोई बिचार
मर गयी है लोगों की अन्दर की जज्बात,
घर उजड़ता देखकर बहुत रहे हैं गरीबों के अश्रुधार,
क्या यही है जीवन की विकास?
स्नेह प्रभा पाण्डेय
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