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सबसे सुंदर

देखा उसके चेहरे पर खुशी थी आज
काँच की पायल पहनी वो
डर रही थी चलने से
कि कहीं पायल चटक ना जाय,
सहेलियाँ देख उसकी थी अचंभित
एक तो वह पायल सुंदर थी
दूसरी वो सबसे सुंदर थी
एक बात यह भी कि पायल कांच की थी,
बेचारी एक जगह मूरत सी खड़ी थी
जैसे चलना वो भूल सी गई थी
नींद खुली तो पता चला
लड़केवाले उसे देखने आए हैं,
माँ मुझे अभी शादी नहीं करनी
मुझे अभी और है पढ़ाई करनी
अभी तो मैने दसवीं पास की है
अभी तो मैं कांच की हूँ
मुझे इस्पात तो बनने दे माँ,
तू सब जानकर भी चुप अनजान है
क्या तुझे दुनियादारी की नहीं पहचान है।
महेश"अमन"
रंगकर्मी

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