, इस देश को जय हिन्द कहते हैं
इस देश में रहने वाले, इस देश को जय हिन्द कहते हैं,
इस बन्दे को लोग प्यार से, अरविन्द कहते हैं।
गिरिडीह में रहता हूँ, पैतृक गांव है राजधनवार,
25 साल से पत्रकारिता में हूँ, लगा न बेड़ा पार।
औरों की तरह मुझे भी जब, परेशान किया आर्थिक मार,
पेट-परिवार चलाने को, शुरू किया व्यापार।
मेरा ऑफिस का पता, गिरिडीह का टावर चौक है,
बचपन से ही मुझे, समाज सेवा का भी शौक है।
सेवा भाव के कारण ही, मैं दूसरे पथ पर भी मुड़ गया,
लायंस क्लब और रेड क्रॉस समेत, कई संस्थाओं से जुड़ गया।
अपने लोगों के धोखे से, मैं हमेशा डरता हूँ,
आपलोग के संगत में आकर, अब कविता पाठ भी करता हूँ।
अरविन्द✍
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इस बन्दे को लोग प्यार से, अरविन्द कहते हैं।
गिरिडीह में रहता हूँ, पैतृक गांव है राजधनवार,
25 साल से पत्रकारिता में हूँ, लगा न बेड़ा पार।
औरों की तरह मुझे भी जब, परेशान किया आर्थिक मार,
पेट-परिवार चलाने को, शुरू किया व्यापार।
मेरा ऑफिस का पता, गिरिडीह का टावर चौक है,
बचपन से ही मुझे, समाज सेवा का भी शौक है।
सेवा भाव के कारण ही, मैं दूसरे पथ पर भी मुड़ गया,
लायंस क्लब और रेड क्रॉस समेत, कई संस्थाओं से जुड़ गया।
अपने लोगों के धोखे से, मैं हमेशा डरता हूँ,
आपलोग के संगत में आकर, अब कविता पाठ भी करता हूँ।
अरविन्द✍


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