बन्द
--उदयशंकर उपाध्याय
समाज के कुछ ठेकेदारों ने,
अपनी दूकान के शटर,
उठा रखे हैं और-
सामानों की बिक्री के लिए,
नई पीढ़ी की बहाली,
बदस्तूर जारी है,
ऐसे ठेकेदारों द्वारा।
वेतन के नाम पर,
एक दिन का चकल्लस भोजन,
और बाइक का ईंधन,
मुफ्त में लो और माल बेचो।
जो खरीददार हैं, वे अपने;
गैर-ग्राहकों को खरीददार,
जबरदस्ती भी बनाओ,
यही हैं असली सपने।
बेरोजगारी का मारा मैं,
शामिल हूँ उस कतार में,
मेरी भर्ती होती है,
उसका सामान बेचता हूँ,
पर यह क्या हो गया!
मैं द्रवित कैसे?
उस ग्राहक को देखकर,
जिसे माल बेचना है।
ओह्ह!
उसके साथ दो निरीह बच्चे,
खड़े हैं मेरे विरोध में,
हमें तुम्हारा माल नहीं लेना,
तुम्हारा सामान खरीदने पर,
हमें भूखे सोना होता है।
जाओ और उन्हें बेचो
अपना सामान, जिनके भरे पेट;
तुम्हारे आकाओं की तरह,
फूले हुए हैं और,
हमे अपने हाल पर,
जीने को छोड़ दो।
©उदयशंकर उपाध्याय
03.07.2017, सोमवार।
समाज के कुछ ठेकेदारों ने,
अपनी दूकान के शटर,
उठा रखे हैं और-
सामानों की बिक्री के लिए,
नई पीढ़ी की बहाली,
बदस्तूर जारी है,
ऐसे ठेकेदारों द्वारा।
वेतन के नाम पर,
एक दिन का चकल्लस भोजन,
और बाइक का ईंधन,
मुफ्त में लो और माल बेचो।
जो खरीददार हैं, वे अपने;
गैर-ग्राहकों को खरीददार,
जबरदस्ती भी बनाओ,
यही हैं असली सपने।
बेरोजगारी का मारा मैं,
शामिल हूँ उस कतार में,
मेरी भर्ती होती है,
उसका सामान बेचता हूँ,
पर यह क्या हो गया!
मैं द्रवित कैसे?
उस ग्राहक को देखकर,
जिसे माल बेचना है।
ओह्ह!
उसके साथ दो निरीह बच्चे,
खड़े हैं मेरे विरोध में,
हमें तुम्हारा माल नहीं लेना,
तुम्हारा सामान खरीदने पर,
हमें भूखे सोना होता है।
जाओ और उन्हें बेचो
अपना सामान, जिनके भरे पेट;
तुम्हारे आकाओं की तरह,
फूले हुए हैं और,
हमे अपने हाल पर,
जीने को छोड़ दो।
©उदयशंकर उपाध्याय
03.07.2017, सोमवार।
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